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अंडकोष (वृषण) कà¥à¤¯à¤¾ है, कारà¥à¤¯ और रोग - What Is Testicles, Function And Diseases In
Testicles (Testes) In Hindi: अंडकोष (वृषण), पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पà¥à¤°à¥à¤· की पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ का à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ अंग हैं। अंडकोष पà¥à¤°à¥‚ष के नीचे à¤à¤• थैली होती है। इसे सà¥à¤•à¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤® कहा जाता है। इस थैली की तà¥à¤µà¤šà¤¾ ढीली होती है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पà¥à¤°à¥à¤· में 2 अंडकोष होते हैं जिसके अंदर वृषण होते है यह पà¥à¤°à¥à¤· सेकà¥à¤¸ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨, सेकà¥à¤¸ डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µ (Sex Drive), पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ और मांसपेशियों तथा हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विकास के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होता है। अंडकोष के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ में खराबी शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ और टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में कमी का कारण बन सकती है। जिसके परिणामसà¥à¤µà¤°à¥à¤ª पà¥à¤°à¥à¤· बांà¤à¤ªà¤¨ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। अतः मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बà¥à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को अंडकोष के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना आवशà¥à¤¯à¤• होता है।
आज के इस लेख में आप जानेंगे कि अंडकोष (वृषण) कà¥à¤¯à¤¾ है, इसके कारà¥à¤¯ कà¥à¤¯à¤¾ हैं तथा इससे समà¥à¤¬à¤‚धित रोगों के बारे में।
विषय सूची
1. अंडकोष कà¥à¤¯à¤¾ है – What Is Testicles (Testes) In Hindi
2. अंडकोष का कारà¥à¤¯ – Testicles Function In Hindi
3. अंडकोष की बीमारियां – Testicles Diseases In Hindi
4. अंडकोष को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखने के तरीके – Healthy Testicles Tips In Hindi
अंडकोष कà¥à¤¯à¤¾ है – What Is Testicles (Testes) In Hindi
अंडकोष (Testicles), जिसे वृषण (Testes) à¤à¥€ कहा जाता है, यह पà¥à¤°à¥à¤· पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के अंग हैं। यह अंडे के आकार के होते हैं, तथा तà¥à¤µà¤šà¤¾ की à¤à¤• थैलीनà¥à¤®à¤¾ संरचना में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ होते हैं। इस तà¥à¤µà¤šà¤¾ की थैलीनà¥à¤®à¤¾ संरचना को अंडकोश की थैली (Scrotum) कहा जाता है। इस थैली की तà¥à¤µà¤šà¤¾ ढीली होती है। जो गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में अधिक बढ़कर लटक जाती है तथा सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सिकà¥à¤¡à¤¼à¤•र छोटी होती है। à¤à¤• आदमी में 2 अंडकोष होते हैं, तथा पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• अंडकोष अंडे के आकार का लगà¤à¤— 5 सेमी लंबा होता है। अंडकोश की लंबाई 5 cm सेमी और चौड़ाई 2.5 सेमी होती है। अंडकोष (वृषण) पà¥à¤°à¥à¤· पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ अंग जैसे- लिंग और गà¥à¤¦à¤¾ के मधà¥à¤¯ अंडकोश की थैली (Scrotum) में लटके हà¥à¤ होते हैं। यह शरीर के मà¥à¤–à¥à¤¯ तापमान की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अपने तापमान को दो डिगà¥à¤°à¥€ सेंटीगà¥à¤°à¥‡à¤¡ कम तापमान पर समायोजित करके रखते हैं।
कम तापमान होने का कारण यह है कि इस कम तापमान पर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ और गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ उचà¥à¤šà¤¤à¤® होती है। अंडकोष (Testicles) मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ और टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ (Testosterone) नामक पà¥à¤°à¥à¤· सेकà¥à¤¸ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करते हैं। टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ सेकà¥à¤¸ डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µ (Sex Drive), पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ (Fertility) तथा मांसपेशियों और हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विकास के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होता है।
वे पà¥à¤°à¥‚ष जो आग के सामने कारà¥à¤¯ करते है, अधिक गरà¥à¤® पानी से सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करते हैं। या टाइट कचà¥à¤›à¤¾ पहनते हैं। उनके अंडकोष से शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ कम मातà¥à¤°à¤¾ में बनते है।
अंडकोष का कारà¥à¤¯ – Testicles Function In Hindi
अंडकोष (वृषण) का मà¥à¤–à¥à¤¯ कारà¥à¤¯ शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ और à¤à¤‚डारण करना है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ अंडकोष का à¤à¤• ओर महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤¯ यह है कि यह टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ या à¤à¤£à¥à¤¡à¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ (Androgens) नामक पà¥à¤°à¥à¤· हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करता है। वृषण को अंडाकार आकार लोबà¥à¤¯à¥‚लà¥à¤¸ (Lobules) नामक ऊतक पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। किसà¥à¤¸à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· में अंडकोष (वृषण) के महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤¯ निमà¥à¤¨ हैं:
अंडकोष शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ का कारà¥à¤¯ करते हैं। शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ अंडकोष के वीरà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• (Seminiferous) नलिकाओं में होता है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• अंडकोष में लगà¤à¤— 700 से 900 टà¥à¤¯à¥‚ब (नलिकाà¤à¤‚) होती हैं। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• टà¥à¤¯à¥‚ब की लंबाई और चौड़ाई कà¥à¤›-कà¥à¤› बाल के समान होती है। यदि इन सà¤à¥€ टà¥à¤¯à¥‚ब को à¤à¤• साथ जोड़ा जाये, तो इसकी कà¥à¤² लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ à¤à¤• फà¥à¤Ÿà¤¬à¥‰à¤² पिच से अधिक होगी। अतः जब शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ वीरà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤• (Seminiferous) नलिकाओं में होता हैं, तो यह अधिवृषण (Epididymis) में से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ हैं। अधिवृषण (Epididymis) à¤à¤• लंबी कà¥à¤‚डलित नलिका होती है, जिसमें शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ परिपकà¥à¤µ होते हैं। शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ परिपकà¥à¤µ होने के बाद वास डेफरेंस (Vas Deferens) के माधà¥à¤¯à¤® से सà¥à¤–लन के दौरान रिलीज़ होने के लिठतैयार होते हैं। वास डेफरेंस में वीरà¥à¤¯ पà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ाओं (Seminal Vesicles) और पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ गà¥à¤°à¤‚थि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ तरल पदारà¥à¤¥, शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ कोशिकाओं के साथ मिलकर वीरà¥à¤¯ (Semen) का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होता है। यह वीरà¥à¤¯ सà¥à¤–लन के दौरान मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— के माधà¥à¤¯à¤® से शरीर से बाहर निकल जाता है।
अंडकोष (Testicles), à¤à¤£à¥à¤¡à¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ नामक पà¥à¤°à¥à¤· हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ à¤à¥€ करते हैं। à¤à¤£à¥à¤¡à¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ पà¥à¤°à¥à¤· पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने और शरीर में मरà¥à¤¦à¤¾à¤¨à¤¾ विकास जैसे- दाढ़ी और à¤à¤• गहरी आवाज आदि के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होता है। इसके अतिरिकà¥à¤¤ à¤à¤£à¥à¤¡à¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ यौन कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨, à¤à¤£à¥à¤¡à¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ का सबसे सामानà¥à¤¯ रूप है। यह पà¥à¤°à¥à¤· जननांगों के विकास और शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की वृदà¥à¤§à¤¿ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• होता है। à¤à¤• सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ पà¥à¤°à¥à¤· के अंडकोष पà¥à¤°à¤¤à¤¿ दिन लगà¤à¤— 6 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® तक टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ कर सकते हैं।
अंडकोष की बीमारियां – Testicles Diseases In Hindi
पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के अंडकोष अनेक पà¥à¤°à¤•ार की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। अंडकोष से समà¥à¤¬à¤‚धित बीमारियाठया तो जनà¥à¤® के दौरान या अनà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती हैं। अंडकोष से समà¥à¤¬à¤‚धित बीमारियाठनिमà¥à¤¨ है, जैसे:
हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤² (Hydrocele) – पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में अकà¥à¤¸à¤° अंडकोष के बढ़ने की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है जिसे आमतौर पर हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤² की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ कहा जाता है। हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤² तब होता है जब à¤à¤• अंडकोष के आसपास गà¥à¤¹à¤¾à¤“ं में अतिरिकà¥à¤¤ तरल पदारà¥à¤¥ जमा हो जाता है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ चोट या सूजन के कारण उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। हाइडà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥€à¤² (Hydrocele) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में अंडकोश में à¤à¤¾à¤°à¥€à¤ªà¤¨, सूजन, दरà¥à¤¦ आदि लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का अनà¥à¤à¤µ किया जा सकता है।
रीटà¥à¤°à¥‡à¤•टाइल टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल (Retractile Testicle) – रीटà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल (Retractile Testicle) तब होता है, जब à¤à¤• अंडकोष (टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल) गà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¨ à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ (Groin Area) और अंडकोष की थैली के बीच चला जाता है। आमतौर पर, इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤° अंडकोष को वापस अपनी उचित सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में ला सकता है, लेकिन अगर यह अंडकोष à¤à¤• ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में अटक (Stuck) जाता है, तो इस समसà¥à¤¯à¤¾ को असेंडिंग अंडकोष (Ascending Testicle) या अनडिसेंडेड वृषण (Undescended Testicle) कहा जाता है। इस समसà¥à¤¯à¤¾ के इलाज के लिठसरà¥à¤œà¤°à¥€ की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
अनडिसेंडेड वृषण या गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤µà¥ƒà¤·à¤£à¤¤à¤¾ (Undescended Testicle (Cryptorchidism)) – यह जनà¥à¤® से पहले à¤à¤• या दोनों अंडकोष का सà¥à¤•à¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤® (Scrotum) में न गिराने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के कारण उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने वाली à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ है। आमतौर पर, पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• पà¥à¤°à¥à¤· दो अंडकोष के साथ पैदा होता है। à¤à¥‚रà¥à¤£ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के समय यह अंडकोष, पेट में पाठजाते हैं, और सातवें महीने के दौरान यह अंडकोष की थैली (Scrotum) में गिर जाते हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€, अंडकोष, सà¥à¤•à¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¤® में नहीं गिरते हैं, जिसके कारण पैदा होने वाला बचà¥à¤šà¤¾ अनडिसेंडेड वृषण (Undescended Testicle) की समसà¥à¤¯à¤¾ के साथ पैदा होता है।
वृषण मरोड़ (Testicular Torsion Or Twisted Testicle) – यह अंडकोष में लगने वाली चोट के कारण उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने वाली à¤à¤• दà¥à¤°à¥à¤²à¤ समसà¥à¤¯à¤¾ है। वृषण मरोड़ (Testicular Torsion) तब होता है, जब वृषण की चोट या ज़ोरदार गतिविधि के कारण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• कोरà¥à¤¡ (Spermatic Cord) मà¥à¤¡à¤¼ जाती है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ किशोर लड़कों को अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। यह मरोड़ अंडकोष को रकà¥à¤¤ की आपूरà¥à¤¤à¤¿, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा कारà¥à¤¯ और शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ परिवहन आदि गतिविधिओं में रूकावट उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ करती है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ अंडकोश में दरà¥à¤¦, सूजन, अधिक पेशाब जाना, जी मिचलाना आदि लकà¥à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤—ट करती है।
अणà¥à¤¡à¤•ोष में सूजन (Orchitis) – ऑरà¥à¤•ाइटिस (Orchitis), अंडकोष की सूजन को पà¥à¤°à¤—ट करने वाली सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है। à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥€à¤¡à¤¿à¤®à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ (Epididymitis) की तरह ही अंडकोष की सूजन (Orchitis) अकà¥à¤¸à¤° à¤à¤• यौन संचारित रोग के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होती है। वृषण में दरà¥à¤¦ और संवेदनशीलता, बà¥à¤–ार, जी मिचलाना और उलà¥à¤Ÿà¥€ आदि इसके पà¥à¤°à¤®à¥à¤– लकà¥à¤·à¤£ हैं। बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² और वायरल दोनों पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ से ऑरà¥à¤•ाइटिस (Orchitis) की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। अंडकोष की सूजन आमतौर पर 7 से 10 दिनों में गायब हो जाती है।
अंडकोष में कैंसर (Testicular Cancer) – अंडकोष की सà¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में सबसे अधिक गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ वृषण कैंसर (Testes Cancer) है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ आमतौर पर 15 और 34 साल के पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। अंडकोष में à¤à¤• कैंसरगà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ टà¥à¤¯à¥‚मर पास वाले ऊतकों में विकसित होकर शरीर के अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤—ों को à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। यह कैंसर आमतौर पर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ पैदा करने में मदद करने वाली टà¥à¤¯à¥‚बलर टेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल (Tubular Testicle) संरचनाओं से शà¥à¤°à¥‚ होता है।
हाइपोगोनैडिजà¥à¤® (Hypogonadism) – हाइपोगोनाडिजà¥à¤® (Hypogonadism) यह à¤à¤• वृषण समà¥à¤¬à¤‚धित समसà¥à¤¯à¤¾ है जो शरीर में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ में कमी का कारण बनती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से समà¥à¤¬à¤‚धित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤•, हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को ठीक तरह से उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ नहीं कर पाता है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ होने के अलावा चोट, संकà¥à¤°à¤®à¤£ या अनà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚- जो कि टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती हैं, के कारण à¤à¥€ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है।
कà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¨à¤«à¥‡à¤²à¥à¤Ÿà¤° सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (Klinefelter | s Syndrome) – यह à¤à¤• आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जो अंडकोष को सामानà¥à¤¯ रूप से विकसित होने से रोकती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पà¥à¤°à¥à¤· à¤à¤• अतिरिकà¥à¤¤ X गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤° के साथ पैदा होता है। कà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¨à¤«à¥‡à¤²à¥à¤Ÿà¤° सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®, टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ के कम उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ का कारण बनती है।
अंडकोष को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखने के तरीके – Healthy Testicles Tips In Hindi
अंडकोष से समà¥à¤¬à¤‚धित सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤ शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥ और टेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤¨ की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ और मातà¥à¤°à¤¾ में कमी का कारण बनती हैं। अतः उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने वाली समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से बचने के लिठअंडकोष का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होना आवशà¥à¤¯à¤• होता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£, तनाव, धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨, अधिक शराब का सेवन और असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¥à¤· के पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर बà¥à¤°à¤¾ असर डाल सकते हैं, अतः इन सà¤à¥€ कारकों से बचाव आवशà¥à¤¯à¤• होता है। शरीर के सामानà¥à¤¯ तापमान से लगà¤à¤— 2 डिगà¥à¤°à¥€ कम तापमान पर अंडकोष को ठंडा रखकर शà¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤£à¥à¤“ं की संखà¥à¤¯à¤¾ और गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ को बढ़ाया जा सकता है। अतः कोई à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ निमà¥à¤¨ तरीकों को अपनाकर अंडकोष के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ दे सकता है, जैसे:
महीने में à¤à¤• बार अंडकोष का सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ परीकà¥à¤·à¤£ करना चाहिये।
नियमित रूप से नहाना चाहिठतथा नहाने के लिठअधिक गरà¥à¤® पानी का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं करना चाहिà¤à¥¤
अंडकोष की थैली को ठनà¥à¤¡à¥‡ पानी से साफ करना चाहिà¤à¥¤
नहाने के बाद लिंग और अंडकोश की थैली को हमेशा सूखा रखना चाहिà¤à¥¤
ढीले और आरामदायक कपड़े पहनना चाहिà¤à¥¤
नियमित तथा संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करना चाहिà¤à¥¤
तनाव से बचना चाहिà¤à¥¤
धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ और अधिक शराब का सेवन नहीं करना चाहिà¤à¥¤
सेकà¥à¤¸ करते समय पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ (कंडोम) पहनना चाहिà¤à¥¤
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